
परिक्रमा मार्ग वृन्दावन (Vrindavan Parikrama Marg)
वृन्दावन, उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित, श्रीकृष्ण की लीलाओं की पावन भूमि है। यहां की ‘परिक्रमा‘ एक धार्मिक पदयात्रा है, जिसमें श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्थलों की परिक्रमा करते हैं। वृन्दावन की परिक्रमा विशेष रूप से कार्तिक मास, गुरु पूर्णिमा, राधाष्टमी, और एकादशी जैसे पर्वों पर अत्यधिक श्रद्धा से की जाती है।
🌿 वृन्दावन परिक्रमा मार्ग की विस्तृत जानकारी:
🔷 1. परिक्रमा की लंबाई:
- लगभग 11-13 किलोमीटर की परिक्रमा है।
- पूर्ण परिक्रमा में लगभग 2.5 से 4 घंटे का समय लग सकता है (पैदल चलने की गति के अनुसार)।
🔷 2. प्रारंभ बिंदु:
- परिक्रमा का आरंभ प्रायः श्री श्री रंगनाथ जी मंदिर (गोदाम) या श्री बांके बिहारी मंदिर के पास से किया जाता है।
- कुछ लोग वृन्दावन के परिक्रमा मार्ग पर कहीं से भी शुरुआत करते हैं, लेकिन परंपरा के अनुसार घड़ी की सुई के विपरीत दिशा (anticlockwise) में की जाती है।
🔷 3. प्रमुख स्थल और पड़ाव:
परिक्रमा मार्ग पर अनेक प्रमुख धार्मिक स्थल आते हैं, जिनमें से कुछ हैं:
क्रम
स्थल का नाम
विवरण
1
मधुकर कुंज
श्री राधा-माधव की लीलाओं का स्थान
2
इमली ताल
भगवान कृष्ण ने यहां बैठकर ध्यान लगाया था
3
श्री चैतन्य महाप्रभु स्थान
महाप्रभु का भक्ति स्थली
4
बंसी बट
जहाँ श्रीकृष्ण बांसुरी बजाते थे
5
श्री बिहारी जी मंदिर
वृन्दावन का प्रसिद्ध मंदिर
6
सेवा कुंज
रास लीला स्थली, जहाँ रात में प्रवेश निषेध है
7
नीम करोरी बाबा आश्रम
प्रसिद्ध संत का आश्रम
8
गोविंद देव जी मंदिर
प्राचीन मंदिर, मुगलकालीन स्थापत्य का उदाहरण
9
कात्यायनी देवी मंदिर
शक्ति उपासना का स्थान
🙏 परिक्रमा करने के नियम:
- शुद्ध भाव से करें – मन, वचन और कर्म से पवित्र रहना चाहिए।
- नंगे पांव चलना – श्रद्धालु परिक्रमा नंगे पांव करते हैं।
- मौन या भजन कीर्तन करते हुए – परिक्रमा के दौरान हरिनाम संकीर्तन, मंत्रजप या भजन करना उत्तम माना जाता है।
- मिट्टी का कण भी साथ न लें – यह भूमि श्रीकृष्ण की लीला भूमि मानी जाती है, इसका कोई अंश घर नहीं ले जाना चाहिए।
- कचरा न फैलाएं – स्वच्छता बनाए रखें, प्लास्टिक आदि का प्रयोग न करें।
🗓️ विशेष अवसर:
- कार्तिक मास (अक्टूबर-नवंबर) में लाखों भक्त परिक्रमा करते हैं।
- राधाष्टमी, जन्माष्टमी, गुरु पूर्णिमा, पूर्णिमा तिथि पर विशेष भीड़ होती है।
🛑 चेतावनी:
- गर्मी के समय में दोपहर में परिक्रमा से बचें।
पानी, टोपी, और हल्का भोजन साथ रखें।